Wednesday, December 10, 2008

प्रथम प्रेम !!


मेरी प्रेरणा मेरी कल्पना , मेरा हर्दय श्रंगार तुम !
मेरे प्रेम रूपी पुष्प पे , सावन की पहली फुहार तुम !!

निर्मल तेरा ये रूप है , तू शीत पावन धुप है !
गंगा पवित्र ये मन तेरा , हर बात तेरी अनूप है !
हर मन प्रफुल्लित हो उठे , शब्दों की वो बोछार तुम !!

आँखों से चंचल हिरणी , तू जब चले तो मोरनी !
मुस्कान मे मोती झरे , मेरा दिल चुराया चोरनी !
मेरी प्रेम परिभाषा हो तुम ,मेरा प्रथम इजहार तुम !!

यादों मे मेरी तुम बसी , हर कल्पना मे तुम रची !
सब ख्वाब तुम से जुड़ गए, धड़कन भी मेरी ना बची !
मन मे बसी तेरी मूरती, पूजा मेरी मेरा प्यार तुम !!

मेरी प्रेरणा मेरी कल्पना , मेरा हर्दय श्रंगार तुम !

Wednesday, November 26, 2008

विजय शिखर !!


बहुत सी आस ले ये मन चला पाने शिखर,
मगर दिल मे है जाने कौन सा अंजाना डर !
कही आंधी न आजाये न खा जाऊँ मै ठोकर ,
समय है कम सफर लंबा बचे है कुछ पहर!

बहुत से हाथ मेरे हाथ को थामे हुए है ,
बहुत से लोग मुझ को अपना सा माने हुए है !
कई रिश्तों की जंजीरे मेरे पैरो मे है ,
कई अनजाने मुझ को दोस्त सा जाने हुए है !
मगर फिर भी है सूनापन मन मे कही,
साँथ काफिला पर लगे तनहा सफर !!

कई छोटे बड़े ख्वाब आँखो मे बसते,
कई अरमान मेरे मन मे रोज सजते !
कई उम्मीद के घरोंदे बन गए है ,
न पाई खुशी के सुर कानो मे बजते !
मगर अंजाना सा डर मन मे है ,
न जाने कौन होगा इस सफर मे हमसफ़र !!

है हर बात का अहसास पर जारी सफर,
न चिंता आए कोई भी मुश्किल अगर !
न जाने कौन सी ताकत है ये मन लिए ,
न लगता कोई भी बाधा से इसको डर !
है बस आस की पूरी हो मांगी दुआ जो ,
मिले जो चाहे कुछ पाना विजय शिखर !!

Friday, November 7, 2008

एक तन्हा मन



एक भोला मन प्यारी आँखे जाने किसको ढूंड रही !
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!

है नादाँ सी कभी कभी , और भोली लगती हर दम है !
पर मन मे तूफान भरा है , पड़ती किसी से ना कम है !
करना है दुनिया को बस मे , सीखना है हर बात नयी !!
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!

मुस्काता सा चहरा इसका , आंखे झील समाई है !
हे मन से भी सुंदर उतनी , ये परी जमी पे आई है !
शब्द ख़तम हो पर बचजाये , इसकी खूबी कई कई !!
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!

Monday, September 22, 2008

अब घर जाना है !!



बहुत हुआ अब घर जाना है !
खोये अपने उन सपनों को पाना है !!

छुटे हाथ झलकती आँखे, सिसकी भर भर चलती सांसे !
पोंछने फिर पलक के आंसू, अपने हाथ बड़ाना है !!

छोड़ी गलियाँ वो चौपाले, छत पे मंडली डेरा डाले !
शाम सुनहरी फिर करदे वो, महफ़िल यार सजाना है !!

प्यार से मिलते संगी साँथी, सिर्फ़ प्रेम की भाषा आती !
बोल जो मीठे भूल चुका मै, फिर होंठो पे लाना है !!

वक्त नही अपनों के खातिर, समय चाल समझा ना शातिर !
पास रहे जो बचे हुए पल, अपनों संग बीताना है !!

सब कुछ है पर मन है खाली, बेरंग होली सूनी दीवाली !
अबके दीवाली दीप जलाऊँ, होली रंग उड़ाना है !!

फ़िर अपनों के संग रहूँगा, मन का हर एक दर्द कहूँगा !
मिला नही बरसों से जो, खोया प्यार पाना है !!

मेरे संग गुनगुनाओ !!



तुम मेरे संग गुनगुनाओ तो कोई बात बने !
थोड़ा खुलकर के मुस्कुराओ तो कोई बात बने !!

रोज मिलते हो गले यारों से !
हाथ दुश्मन से मिलाओ तो कोई बात बने !!

जलते हर शाम मंदिरो मे दिये !
एक घर रौशनी लाओ तो कोई बात बने !!

तेरी बातों पे मुस्कूरादे ये जग चाहे !
किसी रोते को हंसाओ तो कोई बात बने !!

न सँकू मिलता उठ ऊँचा असमानों तक !
किसी गिरते को उठाओ तो कोई बात बने !!

है चार पल की जिंदगी ना रोके बीता !
हर पल हंसके बिताओ तो कोई बात बने !!

सारी दौलत लूटा के ना मिले प्यार कहीं !
दिल ये अपना तुम लुटाओ तो कोई बात बने !!

मोहब्बत !!



मोहब्बत क्या है ये अब तक मै जान ना पाया !
कही दीवानगी कभी पागलपन है बतलाया !!

कोई कहता मोहब्बत नाम हर दम साँथ रहने का !
जो बाँटे हर खुशी मिलके हर गम साँथ सहने का !!
चले हर राह तेरे साँथ जैसे हो तेरा सायाँ !

मोहब्बत क्या लैला और मजनू की कहानी मे !
या मुमताज की यादों भरी इस निशानी मे !!
के है जो हीर और रांझे के किस्सों मे पाया !

मोहब्बत नाम अपने प्यार पर सब कुछ लुटाने का !
ना हो अफ़सोस खातिर यार के सब कुछ गवाने का !!
रहे वो दूर जितना और मन के पास ही आया !

ये वो अहसास जो रिश्तों मे बंध कर रह नही सकता !
करे महसूस ना कोई ख़ुद है क्या कह नही सकता !!
समझ आया न बिन जाने ज़माने भर ने समझाया !

Wednesday, August 6, 2008

बदला है ये वक़्त !!



नही अपना कोई साँथ बदला है ये वक़्त !
हर तन्हा कटे रात बदला है ये वक़्त !!

हर दम संग रहे जो बिछडे ना कभी !
एक पल को नही साँथ बदला है ये वक़्त !!

जेब मे रख फुर्सत घूमते थे कभी !
आज आता नही है हाथ बदला है ये वक़्त !!

जीती बाजी भी एक पल मे हार जाता है !
आदमी की क्या औकात बदला है ये वक़्त !!

साँथ सुख मे थे वो दुःख मे नही !
सो गए उनके जस्बात बदला है ये वक़्त !!

उसको बस एक झलक देखने का अरमा था !
पर ना हो पाई मुलाकात बदला है ये वक़्त !!

आज तन्हा है जो कल सब का प्यारा था !
देदो कोई इश्क की खैरात बदला है ये वक़्त !!

लम्बी है रात फ़िर भी सहर तो आएगी !
बदलेंगे तेरे भी हालत बदला है ये वक़्त !!

कवीता !!



तुम हो मेरा प्रेम कवीता मै कवि प्रियतम तेरा !
मेरी कल्पना से तुम हो , तेरा ही ह्रदय बसेरा !!

खुश होता तो तुमको लिखता फूल क्यारी बगिया !
दुःख मे आंखे नम होती, तुम होती अश्रु नदिया !!
मन मस्ती मे हो चंचल , तुम बनती पंछी डेरा !

जब अपनों से दूर रहा तुझमे ही याद बसाई है !
चुप रहकर भी तेरे जरिये अपनी बात सुनाई है !!
तुम संग तन्हा रात लिखी , यादों से भरा सवेरा !

तुझमे बचपन की पगडन्डी , जीवन के संघर्ष लिखे !
गोद मे सर रखकर सहलाते माँ के वो स्पर्श लिखे !!
ख्वाबों मे उस परी का चलना हाथ थाम कर मेरा !

मै मर जाउँगा !!





अबके बरस भी गर ना बरसी मै मर जाउँगा !
अपने बच्चों को भूखा देख ना पाउँगा !!

हर बरस आस मे तेरी करता रहा बुआई !
तेरे बिन प्यासी फसलें आस लिए मुरझाई !!
जम के तुम एक बार तो बरसो मै तर जाऊँगा !

मन दुःख के बादल उमड़े आसमान है खाली !
आँखों से सावन बरसे बरखा ना आने वाली !!
गर तुम खेत भिगो ना पाई, मै माटी मिल जाऊंगा !!

पिछला कर्ज चुकाने मे गिरवी रखी जमीन !
आई ना इस बार फसल हो जाऊँ खेत विहीन !!
अन्न था जो घर सब बो डाला अब क्या खाऊँगा !!

भूख से बच्चे मुरझाये भागवान है चिंतित !
इश्वर को दया न आये पिघले नही है किंचित !!
लगता सब को लेकर भगवन पास तुम्हारे आऊंगा !!

Tuesday, June 3, 2008

जोकर !!



हँसता ख़ुद और खूब हँसाता , कहते सब उसको जोकर !
कभी उचकता कभी संभलता , फिर गिरता खाकर ठोकर !!

नए नए चहरे लगा , वो नाँच दिखाता है !
पर उसका असली चहरा , कही नजर ना आता है !!
ठोकर पे सब मुसकाए , आंसू उसके पानी लगता !
मातम उसका मनोरंजन , रोने पे ये जग हँसता !!
नये नये रंग दिखलाता , अपना असली रंग खो कर !
हँसता ख़ुद और खूब हँसाता , कहते सब उसको जोकर !

डरता उसका चहरा भी , सबको हँसी दिलाता है !
झूले से बेखोफ कूदता , पर मन मे घबराता है !!
घर उसके मातम भी हो , पर वो हँसता ही दिखता !
भूखे बच्चों की खातिर , वो जोकर बन फिर बिकता !!
भूल सभी गम चल देता , जो दुनिया चाहे वो हो कर !
हँसता ख़ुद और खूब हँसाता , कहते सब उसको जोकर !

इस रंगी चहरे के पीछे , मुर्झाया एक चहरा है !
मायूसी की चादर है , आंखो मे काला घेरा है !!
गौर से देखो हंसती आँखे , उसकी हालत बताती है !
मजबूरी भी कभी कभी , जोकर बना हँसाती है !!
पर फिर भी वो खेल दिखाता , अपने आँसू मुह धोकर !
हँसता ख़ुद और खूब हँसाता , कहते सब उसको जोकर !

पंछी !!



उड़ते परिंदे पे निशाना
साधा ही था
की आवाज आयी ,

पापा हमे भी उड़ना सिखाओ .
हमे भी असमान मे जाना है
चाँद तारों को पाना है ..

सुनकर ये खयाल आया ,
की पंछी उड़ने का हौसला देता है..
हवाओं को चीर आगे बडो ,
पंख फैला कर कहता है ...

गर गिर गया आज मेरे निशाने से,
तो कौन देगा हौसला उड़ने का ..
कौन कविताओ मे बनेगा प्रतीक,
आगे बड़ने का..

फिर शायद मेरी बेटी भी ना कहे
उससे उड़्ना है ,
आगे बड़ चाँद तारे
मुट्ठी मे करना है..

इन्ही सोच मे
हाथ थम गए,
और असमान का पंछी
छितिज मे ओझल हो गया ...

Monday, June 2, 2008

बम विस्फोट हुआ !!



शाम सुनहरी हँसते चहरे , कहीँ आरती अजान दुआ !
लौट रहे थे पंछी घर को , सूरज पश्चिम ओंट हुआ !!
उभरे तब आतंकी चहरे , दन से बम विस्फोट हुआ !
बिखरी चिथडों मे लाशें , फैला रक्त रुदन धुआँ !!

कुछ पल फैला सन्नाटा , फिर दशों दीशा चीत्कार उठी !
देख नजारा दहशत का , हर नयन अश्रु बौछार उठी !!
बहा लहू पानी सा , कदम कदम पे लाश पड़ी !
खैल घिनौना खेल यहाँ , अभिमानित सी मौत खड़ी !!
कुछ वह्सी लोगों मे फिर , मानव बस एक नोट हुआ !
उभरे कुछ आतंकी चहरे , दन से बम विस्फोट हुआ !!

बचे हुए जब संभले भागे , जो घायल उन्हें बचाने को !
बीछडे भगदड़ मे परिजन , मृत या जीवीत मिलाने को !!
उड़ा कहीँ पैर किसी का , खो गयी कहीँ नयन ज्योति !
सन्नाटा कानो ने ओड़ा , दूर कही वाणी लौटी !!
घाव लिए हिचकी भर रोता , जीवन मन चोट हुआ !
उभरे कुछ आतंकी चहरे , दन से बम विस्फोट हुआ !!

ढूंड रहे खोया जो अपना , घायलों के डेरो मे !
मिला नही जब जीवीत ढूंडे , लाशों के ढेरों मे !!
कही किसी का लाल मिला , कही मिला घायल भाई !
कुछ लोगो की किस्मत ना, मृत परिजन देह आयी !!
कोई म्रत्यु वरन हुआ , कोई जीवन ओंट हुआ !
उभरे कुछ आतंकी चहरे , दन से बम विस्फोट हुआ !!

फिर भोर भई अगली , जो बचे वापस काम चले !
दो मिनट हुआ मोन , कुछ जगह शोक फूल डले !!
फिर चला घोशना दौर , यहाँ स्मारक बनवायेंगे !
हर घायल को दुर्घटना की, छतिपुर्ती दिलवाएंगे !!
कुछ नेता मृत घर पहुचे, जीवित परिजन एक वोट हुआ !
हर बार यही होता है , जब जब बम विस्फोट हुआ !!

समटी लाशों के टुकडों मे , किसका मजहब कौन कहे !
पटा पड़ा फर्शो पे लहू , क्या उसमे कोई धर्म बहे !!
गहरे जख्मो ने कभी क्या , अपनी जात बताई है !
निर्दोशो की बलि चडै , कैसी जेहाद बनाईं है !!
क्या किलकारी मे राम राम, या अल्लाह अल्लाह बोध हुआ !
तो फिर क्यों मजहब के नाम , एक और विस्फोट हुआ !!

Friday, May 30, 2008

memorial day !!


ना भूल पाऊँ मै मस्ती के दिन वो चार !
memorial day की छुट्टी बन गयी यादगार !!

मस्ती धूम ह्ल्ला और कई खेल !
रात भर जग के सुबह की रेलम पेल !!

वो बात बात झगड़ा फिर हँसी का दौर !
थोड़ी देर चुप सब फिर बहुत सा शोर !!

अराज भाई solo मे दिखते सब के साँथ !
विवेक भाई भाभी की जोड़ी की क्या बात !!

वो हर जगह बबली का फोटो निकलवाना !
गाड़ी पे झटका खाके वो मेरा गिर जाना !!

दीपाली भाभी का हँसना और हँसाना !
विवेक भाई का हौले से मुस्कुराना !!

अराज भाई तो लगते गुरु style !
बबली के चहरे पे हर दम रहे smile !!

put in bay की बोट cedar point राइड !
आया बहुत मजा देख niagra साइड !!

वो seagals का हर जगह दिख जाना !
और हंस के जोर से see girls चिल्लाना !!

कई दिनों बाद पाया इतना अपनापन !
पाके सब का साँथ झूम उठा मन !!

फिर आए ऐसा दिन मिले सभी यार !
न भूल पाऊँ मै मस्ती के दिन ये चार !!

एक छोटी शुरुवात !!



कट जाये लंबा सफर , एक छोटी शुरुवात तो कर !
बन जाये रिश्ते नए , हँसके तू मुलाकात तो कर !!

खामोशी से सन्नाटा , फिर बनती तन्हाई है !
तन्हाई ना अश्क बने , उससे पहले बात तो कर !!

समझ ना के तू तनहा है , नही चलेगा कोई संग !
थामने को तैयार है हम , अपना आगे हाथ तो कर !!

चाँद को ही बस चाहा है , आये सितारे नजर नही !
प्यार करोगे उनसे भी , चाँद के बिन एक रात तो कर !!

झूटी जीत की चाह मे , सच्चे रिश्ते मरते गए !
सारा जग फिर अपना बने , दिल की तू मात तो कर !!

खुशी तेरे आंगन मे होगी , दरवाजे तो खोल जरा !
बाहर आ तू खिड़की से , ऐसे कुछ हालात तो कर !!

डरा तो फिर ना बड़ पायेगा , हार रहेगी दामन मे !
जीत का सहरा पाना है , बधाओं पे घात तो कर !!

जँहान बना दें !!



क्यों चाहें एक फूल गुलिस्तान बना दें !
हर चहरा मुस्कुराये वो जँहान बना दें !!

मिल जाए क्या तुझको गर बन गया खुदा !
संग आ मेरे कुछ लोगों को इंसान बना दें !!

मारने से आदमी ना खत्म हो बूरा !
जड़ मिटाए जो सैतान बना दें !!

करने जो उजाला छत तोड़ने चले !
घर उनकी दीवारों पे रोशनदान बना दें !!

कुछ लोग यहाँ अच्छे बस्ती ना तू जला !
बंद करदे वो दूकान जो हैवान बना दें !!

अश्कों से मिटा दे थोड़ी तो उनकी प्यास !
हैवानियत ना उनको बेजान बना दें !!

आ करदे एक मजहब इंसानियत हो नाम !
इस इश्क को सबका भगवान् बना दें !!

ये प्रेम ढाई आखर गीता मे एक रख !
बाकी जो डेड़ बचता कूरान बना दें !!

Saturday, May 17, 2008

चले गये तुम !!



चल गये तुम देकर , थोड़े आँसु कुछ यादेँ !
कौन करेगा पूरे बोलो , किए हुए तेरे वादे !!


हमने रोका तुम भी रुकते , पर कुछ यूं हालात बने !
विदा हुए हम देखते रहे , राख मे तेरी हाथ सने !!
चिता मे तेरे साँथ जल गयी , तेरी हँसी तेरी बातें !
कौन सुनाएगा वो किस्से , जिनसे कटती थी राते !!
कौन करे फरमाइश पुरी , जो मांगू तू वो लादे !


चले गए तब ज्ञात हुआ , अपना खोना क्या होता है !
याद मे तेरी साथ मेरे , घर आंगन भी रोता है !!
वही आंगन ढूँडते थे तुम , मै कहीँ छुप जाता था !
कईँ सवाल पूछोगे ये , सोच नजर चुराता था !!
बड़े जटिल लगते थे , प्रश्न तेरे सीधे सादे !


लौट के ना आओगे तुम , इस मन को समझाता हूँ !
पर तेरी यादों की दस्तक , हर कोने मे पाता हूँ !!
माना अब हमने तेरे बिन , मुस्कुराना सिख लिया !
वक्त के साथ अकेले ही , कदम मिलाना सिख लिया !!
अगले जनम तुमको इश्वर , फिर हमसे ही मिलवादे !

आदम नसल !!



हो गया सब एक सा कुछ तो बदल !
जिंदगी मे साँथ हूँ तू कर पहल !!


है भरम लगता उसे सब कुछ नया !
आदमी बदला नही कपड़े बदल !!


प्यार से बढ़्कर बहुत से काम है !
इस्क मे अंधे है वो पर तू सम्भल !!


जीत पे मुस्कान उसकी देखने !
हारता हूँ रोज उल्टी चाल चल !!


बोल ना पाया कभी जब हाले दिल !
लिख दी तेरे नाम मैने एक गजल !!


मिट ही जाता वो अगर चुकता ना कर्ज !
शुक्र है इस बार थी अच्छी फसल !!


मिल गयी धरती तो चाहे आसमा !
खत्म ना हो चाह ये आदम नसल !!

डगर !!



ए डगर तू साथ मेरे क्यों ना चलती है !
दौड़ कर मै आऊँ तू आगे निकलती है !!


कर रहा दीदार जब महसूस उसको हो !
बाँध कर जुड़ा खुला वो संभलती है !!


आ बदल दे आज इस आंधी का रुख !
रोज मेरे गाँव से ही ये निकलती है !!


होगा कुछ मीठा पानी समन्दर का !
सोंच कर ये रोज वो गागर बदलती है !!


काम है बाकि बहुत जल्दी से निपटा लें !
जिंदगी ये रेत सी मुट्ठी फिसलती है !!


कहते जो पत्थर उन्हे आके अब देखो !
मेरे एक अश्क से भी वो पिघलती है !!


तोड़कर कल ला दिये तारे बहुत !
चाँद लादूँ अब उसे जिद पे मचलती है !!

Tuesday, May 13, 2008

मन !!



ना मिली हो तुम मगर , उम्मीद पे जीता है मन !
टूट कर बिखरे सितारे , असमाँ सिता है मन !!

न हो तुम फिर भी तुम्हारे , होने का अहसास है !
पर रहोगी साथ एक दिन , ये मेरा आभास है !!
तुम रहोगी सोच कर , अब तलक रीता है मन !
ना मिली हो तुम मगर , उम्मीद पे जीता है मन !

तुम मेरी सच्चाई हो या , तुम हो मेरी कल्पना !
ख्वाब का सच या कोई , सच भरा सपना बुना !!
सोच रातों करवटें ले , आँखों मे बीता है मन !
ना मिली हो तुम मगर , उम्मीद पे जीता है मन !

आयेगी वो शाम भी जब , मेरे आंगन आओगी !
ख्वाब मे देखे मेरे , अरमान सच कर जाओगी !!
पोछोगी ये अश्क जो , चुपचाप ही पीता है मन !!
ना मिली हो तुम मगर , उम्मीद पे जीता है मन !

मेरे साथ चलो !!



भटका हूँ ना मुझै , है रासतों का डर !
मंजिल तुम्हे पाना है, मेरे साथ चलो !!

कांटो से भरी राह , तुम चल न सकोगे !
पथ फूल बिछाना है , मेरे साथ चलो !!

देखे थे जो सपने , हकीकत वो बन गए !
नये ख्वाब सजाना है , मेरे साथ चलो !!

मंजिल पे है निगाह , ये हौंसले बुलंद !
अमृत का तराना है , मेरे साथ चलो !!

कर लूँ सफर मै तनहा, पर तुम चलो तो अच्छा !
एक और बहाना है , मेरे साथ चलो !!

टूट कर गिरे कल , बिखरे जमी सितारे !
फिर छत पे लगना है, मेरे साथ चलो !!

कल रात चांदनी की , चन्दा से हुई अनबन !
रुठी वो मनाना है , मेरे साथ चलो !!

धोके है बड़े कितने , फरेब भरे है !
रंग बदले जमाना है , मेरे साथ चलो !!

न बैठ मन दुखी , देख शिखर ऊँचे !
पर्वत शिखा पाना है , मेरे साथ चलो !!

अब उठ तू न अलसा , सूरज भी चढ़ चला !
लंबा हमे जाना है , मेरे साथ चलो !!

Monday, May 12, 2008

मै चुप हूँ !!



हूँ चुप तो ये नही समझो , कुछ मै कह नही सकता !
तुम्हारे शब्द रूपी बाणों को , मै सह नही सकता !!
ना समझो है नही मुझको , तुम्हारे शब्दों का ज्ञान !
हूँ चुप मै इसी मे है , तुम्हारा और मेरा मान !!

सुना कर शब्द कटु कुछ , मै तुमसे जीत भी जाऊँ !
दिखा कर क्रोध अपना , तुम को मै भयभीत भी पाऊँ !!
मगर संस्कारों की सीमा है , मर्यादा का है भान !
हूँ चुप मै इसी मे है , तुम्हारा और मेरा मान !!

बहुत छोटी सी ये बात , फिर कुछ उग्र हो जाए !
अभी जो शांत है एक दूजे पे , हम रुद्र हो जाए !
खो जाएगा प्रेम , बस टकरायेंगे अभीमान !!
हूँ चुप मै इसी मे है , तुम्हारा और मेरा मान !!

रहूंगा मौन मै फिर भी , कहो कायर पराजित तुम !
न चाहू वो विजय जिसमे हो , रिश्तों की गर्मी गुम !!
झूटी जीत से प्यारा , अपने रिश्ते का सम्मान !
हूँ चुप मै इसी मे है , तुम्हारा और मेरा मान !!

Thursday, May 8, 2008

रब बदला !!



न हम बदले न तुम बदले, मगर लगता है सब बदला !
ख़बर ना हम को लग पाई , जहाँ ये जाने कब बदला !!

थी बस ये आरजू दामन मेरे , दो चार खुशीयाँ हो !
हे मेरी हर दुआ जायज, मगर लगता है रब बदला !!

बहुत गुजरे तमन्ना ले , की एक दीदार तेरा हो !
न आए तुम कभी दर पे , तो रस्ता हमने अब बदला !!

मैं चलता कुछ कदम तो ओर , पर ऐसी लगी ठोकर !
करू क्या बात गैरों की , के रंग अपनों ने जब बदला !!

न मझधारो पे मै हारा , मगर डूबा किनारे पे !
नजर आया ही था साहिल, हवाए रुख के तब बदला !!

कभी हर दिल मे जीता था , के हर चहरे पे हँसता था !
हुआ विरान मरघट सा , शहर ये जाने कब बदला !!

न हम बदले न तुम बदले, मगर लगता है सब बदला !

Thursday, May 1, 2008

तुम आए ना ख़त कोई !!



राह तकी सूरज सर तक , हर आहट आंगन दौड़ गयी !
आस लगी आओगे पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !!

रोली हल्दी थाल सजायी , घीसा चंदन बाती बनाईं !
आओ द्वार आरती उतारू , भर घी दीपक जोत जलाई !!
माथे तिलक लगाती पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !

लीपा आंगन ओटली धोली , दरवाजे मांडी रंगोली !
थके तेरे पैरो पे लगाने , थोडी सी महंदी भी घोली !!
अपने हाथ लगाती पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !

तेरी पसंद की साग बनाईं , जूने चावल खीर पकाई !
आते गरम पूरी तल देती , जला के चूल्हा रखी कडा़ई !!
अपने हाथ खिलाती पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !

पीपल नीचे खाट लगाई , ढीली निमार कल कसवाई !
थक कर लेटोगे कुछ पल , हाथ बुनी दरी बिछाई !!
आंचल हवा झिलाती पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !

हर दिन यूं ही राह तकी , बरस गए पर आस बची !
अंत साँस तक इन्तजार मे , पीपल नीचे खाट रखी !!
आज हुई दरवाजे दस्तक , तुम आए पर मै सोई !

आस लगी आओगे पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !!

Monday, April 28, 2008

परी या पगली !!



क्या लिखुँ उसके बारे मे, शब्द मेरे कम पड़ जाए !
कहूँ परी या पगली कोई , मन कुछ समझ ना पाए !!

नाम के जैसी मीठी बोली , हँसी खुशी की ये रंगोली !
तीखे तीखे नैन नक्श , प्यारी प्यारी सूरत भोली !!
जान बचा भागे हर कोई , पर गुस्सा जब आ जाए !
कहूँ परी या पगली कोई , मन कुछ समझ ना पाए !!

कभी करे शैतानी कभी, बन जाए बहुत सयानी !
कभी हँसे पगली सी ख़ुद पे , करके कुछ नादानी !!
कभी मचल जाए बच्चों सी , गर ये जिद पे आए !
कहूँ परी या पगली कोई , मन कुछ समझ ना पाए !!

कई ख्वाब आँखों मे ले, मन अरमान सजाये है !
जीवन मै हो प्यार यही, आशा दीप जलाये है !!
मेरी दुआ हर ख्वाब हो पुरा , जीवन आनंद मय हो जाए !
हो परी या पगली कोई , मेरी दोस्त ये कहलाये !!

Wednesday, April 23, 2008

आवाज देना आजाऊंगा !!



जीवन लगे तुझको भंवर , ना कोई संग तनहा सफर !
आवाज देना तब मुझे , संग चलने को आजाऊंगा !!

तेरी तरफ़ हालात है , अपने संग दिन रात है !
सुख की सुनहरी धुप है , मय चांदनी हर रात है !!
जब सुख अँधेरा ओढ़ ले , तेरे अपने भी मुह मोड़ ले !
काली अमावस रात पर, मै दीप बन जल जाऊंगा !!
आवाज देना तब मुझे , संग चलने को आजाऊंगा !!

ये रूप जब तक संग है , चहरे सुनहरा रंग है !
हर कोई तुझ को प्यार दे , दुनिया के ऐसे ढंग है !!
जब रूप ले तुझसे विदा, ना कोई हो तुझ पे फ़िदा !
तेरे हुस्न पे लिख के गजल, हर एक महफ़िल गाऊंगा !!
आवाज देना तब मुझे , संग चलने को आजाऊंगा !!

ना हार ना कोई जीत है, ये प्रेम पावन दीप है !
शर्तो मै जो बंध कर रहे, सौदा है ना वो प्रीत है !!
ये शर्त सारी छोड़ कर, भ्रम हार जीत का तोड़ कर !
गर संग मेरे चल सको, मै राह फूल बिछाऊंगा !!
आवाज देना तब मुझे , संग चलने को आजाऊंगा !!

Friday, April 18, 2008

पश्चिम के सूरज !!



पश्चिम से जाते हुए दोस्त सूरज !
कुछ पल मे पहुँचो जब पूरब मेरे घर !!

तो पूछेगी माँ है मेरा लाल कैसा , छुकर के पैरों को उंनसे ये कहना !
महसूस करता वही हाथ सिर पे , जो जाते हुए रोते उसने रखा था !
अभी तक जुबान पे वही स्वाद गुड़ का , हाथोँ से जो आखरी चखा था !
कहना बहुत याद करता हूँ उसको !!
ऐ पश्चिम से जाते हुए दोस्त सूरज !

पिताजी मिलेगें वही चाय पीते , कुछ पल उनके संग बैठ लेना !
महसूस करना छुपी मन मे हलचल , है चिंता मेरी पर जताते नही है !
भरती है आंखे मुझे याद कर के , मगर बोलकर वो बताते नही है !
कहना हूँ अच्छा करें ना यूं चिंता !!
ऐ पश्चिम से जाते हुए दोस्त सूरज !

मिलेगा बिस्तर मै उन्नीदा भाई , उठा के कहना की दिन चढ़ चला है !
आंगन मे गीले कपड़े सुखाती , हँसके मिलेगी भोली सी बहना !
दोनों लड़े ना मेरे ख़त को लेकर , रखे ध्यान सबका उंनसे ये कहना !
कहना की आऊंगा इस बार जल्दी !!
ऐ पश्चिम से जाते हुए दोस्त सूरज !

मिल जाए गर चौक पे यार कोई ,मिलना गले और उससे ये कहना !
मिला ना कभी यहाँ दोस्त तुझसा , है महफ़िल यहाँ पर मजा वो नही है !
अकेला हूँ मै ना कोई संग साँथी , बिना यारों के जिंदगी कट रही है !
कहना की आऊंगा महफ़िल सजाने !!
ऐ पश्चिम से जाते हुए दोस्त सूरज !

आओगे कल तो पुछृँगा तुमसे , कोई घर मिला क्या !
पिताजी है कैसे कहा क्या है माँ ने , उठा था क्या भाई बहाना हँसी क्या !
मिली थी क्या नुक्कड़ पे यारो की महफ़िल , अभी तक है दिल मे यादें बसी क्या !
मिलुंग तुम्हे कल पूरब दिशा मै !!
ऐ पश्चिम से जाते हुए दोस्त सूरज !

Thursday, April 17, 2008

कहते हो क्यों बस मुझे ही दीवाना !!



कहते हो क्यों बस मुझे ही दीवाना, कोई तेरे दिल मे भी आया तो होगा !
रातों की नींदे मेरी चुराई, तुझे भी किसी ने जगाया तो होगा !!

कभी तो मिली होंगी उससे निगाहें , तुझे देख वो मुस्कुराया तो होगा !
कभी नाम लिख कर मेहंदी से उस का, हथेली से अपने मिटाया तो होगा !!

ये दिन कट रहे खयालों मे तेरे , लिए याद तेरी रातें गुजरती !
क्या कहता जमाना इसी को मोहब्बत, तुझे भी किसी ने बताया तो होगा !!

करता हुँ गर तुझसे सपनो मे बातें, मुझको बताओ की ये क्या गुनाह है !
किसी से ख्वाबो मे शर्मा के तुमने, दुप्पटे से मुखड़ा छुपाया तो होगा !!

कहते वो मुझसे उन्हें भूल जाऊँ , न लाब्जो पे उनका कभी नाम लाऊँ !
तड़प कर किसी को पुकारा तो होगा, कोई याद उनको भी आया तो होगा !!

कहते हो क्यों बस मुझे ही दीवाना, कोई तेरे दिल मे भी आया तो होगा !

Friday, April 11, 2008

भैंस से US तक !!



स्वपन मे सोचा न था के इस मूकाँ तक आऊंगा !
जिंदगी की दौड़ मे क्या दो कदम चल पाउँगा !!
पर ये किस्मत लेके आयी गाँव से परदेस तक !
आ गया मै चलते चलते भैंस से US तक !!

आसमाँ मे देखता था जिन जहाजों की उडान !
नापता फिरता हूँ उससे असमा और ये जहान !
पार कर सतो समन्दर, उड़ गया विदेस तक !!
आ गया मै चलते चलते भैंस से US तक !!

जिंदगी हर मोड़ पे तू खुशियाँ लेके आयी है !
मांगे बिन ही हर खुशी दामन मै अपने पायी है !
चाहा जब पहुंचा दीया , मुझको हर उद्देश्य तक !!
आ गया मै चलते चलते भैंस से US तक !!

कर न पता कुछ भी मै , होता अगर तान्हा सफर !
हाथ थामे गर न चलते, जन्मदाता हर डगर !
कर्ज ये लौटा ना पाऊं प्राण इस तन शेष तक !!
आ गया मै चलते चलते भैंस से US तक !!

आँखे भर आती है, जब याद आए खेत की !
बैलो को हांका था , आम्बवा की उस बेंत की !
दौड़ते पग्डन्डीयो पे, लकड़ी के उस चाक की !
रात भर जलके बुझी, हलकी गरम उस राख की !
चूल्हे पे पकती रोटी , हांडी उबलती दाल की !
ठंडी के जलते आलावो मे लकड़ी साल की !
मन वही है चाहे बदले भाषा और भेस तक !
आ गया मै चलते चलते भैंस से US तक !!

Thursday, April 10, 2008

जीत का संशय !!



जीत का संशय हो पर, रुक न चाहे कोई रण हो !
युद्ध कर तन प्राण जब तक, फिर विजय या मरण हो !!

गर ये जीवन हो सरल, जीने मै क्या रह जाएगा !
जीत बिन महनत मिले , मन खुश कहा रह पायेगा !
हर्ष मंजिल पाने का जब, कर्म पथ कंटक चरण हो !!
युद्ध कर तन प्राण जब तक, फिर विजय या मरण हो !!

जीत का अभिमान ना , हो ना मन दुख हार कर !
हर पराजय सीख लेकर, ख़ुद को फिर तैयार कर !!
मन प्रतिज्ञा विजय भर, मार्ग हर बाधा हरण हो !!
युद्ध कर तन प्राण जब तक, फिर विजय या मरण हो !!

म्रत्त्यु हर जीवन को आयी, कोई मानव बच न पाया !
मिट्टी मै मिल जायेंगे सब, कोई संग अमृत न लाया !
मर तू यूँ की संग तेरे, वीर गति का वरण हो !!
युद्ध कर तन प्राण जब तक, फिर विजय या मरण हो !!

Saturday, April 5, 2008

नयी प्रीत लिए ये सहर आयी !!



फिर आज खुशी से मन महका, फिर आज ये आंखे भर आयी !
हे रात गयी काली थी जो , नयी प्रीत लिए ये सहर आयी !!

घनघोर घटाए छट सी गयी, चमके सुख का सूरज खुलके !
हे मन से गया तम दूर कही, यू उजला हुआ दर्पण धुलके !
फिर सागर मै खुशियाँ लहरे, भीनी भीनी सी है पुरवाई !!

हर भोर हुई उजली उजली, हर साँझ लगे महकी महकी !
ये दिन पगला सा लगता है, हर रात लगे बहकी बहकी !
है दिवस दिवस उल्लास लिए, पल पल मै है मस्ती छाई !!

ये मन उड़ता पंछी की तरह, इस तन मे जागा जोश नया !
बेहोश था जो बरसों से कही, जीवन को है आया होश नया !
टूटे थे जीवन तार कही, है नयी तरंगे फिर आयी !!
हे रात गयी काली थी जो , नयी प्रीत लिए ये सहर आयी !!

कर ले बाते बैठ जिन्दगी !!



कर ले बाते बैठ जिन्दगी , जाने कल रहे ना रहे !
ले जाए मौत मुझे कब , बातो का वक्त रहे ना रहे !!

कर ले कुछ बाते कल की, बीते हुए हर पल की !
मुस्कुराके मिली जहाँ तू , माँ के उस आंचल की !!
पहले कदम के साथ की , दौड़ते दिन और रात की !
हर मेरे जस्बात की , अच्छे बुरे हालत की !!
हर खुशी जो हमने बांटी , हर दुःख जो साथ सहे !
कर ले बाते बैठ जिन्दगी , जाने कल रहे न रहे !!


देखा मेने तुझको रोते अपनी माँ की आँखों मे !
शेतानी पे मुझ पर उठते उसके के कोमल हाथो मे !!
हाथ पकड़ जो मुझे चलाते बाबुल के दुलार मे !
आंगन की उस लुका छिपी मे, हर जीत और हार मे !!
हँसते यारो के चहरो मे , हर पल मेरे साथ रहे !!
कर ले बाते बैठ जिन्दगी , जाने कल रहे न रहे !!


करे बात कुछ उस पगली की, आयी है मेरे जीवन मे !
खुशियाँ जो लेके आयी है , बिखराने मेरे आंगन मे !!
हंसती है मेरी बातो पे, कभी मचल वो जाती है !
देखु जब मै उस को हँसके , मुझे देख शर्माती है !!
कभी कभी नैना बतियाते, लाब्जो से कुछ भी न कहे !!
कर ले बाते बैठ जिन्दगी , जाने कल रहे न रहे !!