Thursday, January 29, 2009

मन सरीता !!




अंश अपने मन का कर तुझको को समर्पित !
लिख रहा तेरे लिए मन की सरीता !!

है बहुत लिखना मगर शब्द कम है !
भावना के बोल और मन की कलम है !!
अपने मन मे जो तेरी मूरत बसाई !
वो नही मिटती किसी से भी मिटाई !!
तुम ही मेरे मन की हो पहली करीता !

जब अकेला था जीवन डगर मे !
मित्र बन चलदी संग तुम सफर मे !!
क्या हूँ मै मुझको तुमने बताया !
और जब भटका कही तुमने बचाया !!
जान पाया तुमसे ही क्या है वनीता !

जो मिला तुमसे तेरा उपकार समझूँ !
जो मिले तुमसे तुम्हारा प्यार समझूँ !!
चाँहू सब लौटाना इस जीवन सफर मे !
हाथ तेरा थाँमू हर मुश्किल डगर मे !!
है दुआ तुम रहो हर दम सस्मिता !

लिख रहा तेरे लिए मन की सरीता !!

Wednesday, December 10, 2008

प्रथम प्रेम !!



मेरी प्रेरणा मेरी कल्पना , मेरा हर्दय श्रंगार तुम !
मेरे प्रेम रूपी पुष्प पे , सावन की पहली फुहार तुम !!

निर्मल तेरा ये रूप है , तू शीत पावन धुप है !
गंगा पवित्र ये मन तेरा , हर बात तेरी अनूप है !
हर मन प्रफुल्लित हो उठे , शब्दों की वो बोछार तुम !!

आँखों से चंचल हिरणी , तू जब चले तो मोरनी !
मुस्कान मे मोती झरे , मेरा दिल चुराया चोरनी !
मेरी प्रेम परिभाषा हो तुम ,मेरा प्रथम इजहार तुम !!

यादों मे मेरी तुम बसी , हर कल्पना मे तुम रची !
सब ख्वाब तुम से जुड़ गए, धड़कन भी मेरी ना बची !
मन मे बसी तेरी मूरती, पूजा मेरी मेरा प्यार तुम !!

मेरी प्रेरणा मेरी कल्पना , मेरा हर्दय श्रंगार तुम !

Wednesday, November 26, 2008

विजय शिखर !!


बहुत सी आस ले ये मन चला पाने शिखर,
मगर दिल मे है जाने कौन सा अंजाना डर !
कही आंधी न आजाये न खा जाऊँ मै ठोकर ,
समय है कम सफर लंबा बचे है कुछ पहर!

बहुत से हाथ मेरे हाथ को थामे हुए है ,
बहुत से लोग मुझ को अपना सा माने हुए है !
कई रिश्तों की जंजीरे मेरे पैरो मे है ,
कई अनजाने मुझ को दोस्त सा जाने हुए है !
मगर फिर भी है सूनापन मन मे कही,
साँथ काफिला पर लगे तनहा सफर !!

कई छोटे बड़े ख्वाब आँखो मे बसते,
कई अरमान मेरे मन मे रोज सजते !
कई उम्मीद के घरोंदे बन गए है ,
न पाई खुशी के सुर कानो मे बजते !
मगर अंजाना सा डर मन मे है ,
न जाने कौन होगा इस सफर मे हमसफ़र !!

है हर बात का अहसास पर जारी सफर,
न चिंता आए कोई भी मुश्किल अगर !
न जाने कौन सी ताकत है ये मन लिए ,
न लगता कोई भी बाधा से इसको डर !
है बस आस की पूरी हो मांगी दुआ जो ,
मिले जो चाहे कुछ पाना विजय शिखर !!

Friday, November 7, 2008

एक तन्हा मन



एक भोला मन प्यारी आँखे जाने किसको ढूंड रही !
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!

है नादाँ सी कभी कभी , और भोली लगती हर दम है !
पर मन मे तूफान भरा है , पड़ती किसी से ना कम है !
करना है दुनिया को बस मे , सीखना है हर बात नयी !!
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!

मुस्काता सा चहरा इसका , आंखे झील समाई है !
हे मन से भी सुंदर उतनी , ये परी जमी पे आई है !
शब्द ख़तम हो पर बचजाये , इसकी खूबी कई कई !!
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!

Monday, September 22, 2008

अब घर जाना है !!



बहुत हुआ अब घर जाना है !
खोये अपने उन सपनों को पाना है !!

छुटे हाथ झलकती आँखे, सिसकी भर भर चलती सांसे !
पोंछने फिर पलक के आंसू, अपने हाथ बड़ाना है !!

छोड़ी गलियाँ वो चौपाले, छत पे मंडली डेरा डाले !
शाम सुनहरी फिर करदे वो, महफ़िल यार सजाना है !!

प्यार से मिलते संगी साँथी, सिर्फ़ प्रेम की भाषा आती !
बोल जो मीठे भूल चुका मै, फिर होंठो पे लाना है !!

वक्त नही अपनों के खातिर, समय चाल समझा ना शातिर !
पास रहे जो बचे हुए पल, अपनों संग बीताना है !!

सब कुछ है पर मन है खाली, बेरंग होली सूनी दीवाली !
अबके दीवाली दीप जलाऊँ, होली रंग उड़ाना है !!

फ़िर अपनों के संग रहूँगा, मन का हर एक दर्द कहूँगा !
मिला नही बरसों से जो, खोया प्यार पाना है !!

मेरे संग गुनगुनाओ !!



तुम मेरे संग गुनगुनाओ तो कोई बात बने !
थोड़ा खुलकर के मुस्कुराओ तो कोई बात बने !!

रोज मिलते हो गले यारों से !
हाथ दुश्मन से मिलाओ तो कोई बात बने !!

जलते हर शाम मंदिरो मे दिये !
एक घर रौशनी लाओ तो कोई बात बने !!

तेरी बातों पे मुस्कूरादे ये जग चाहे !
किसी रोते को हंसाओ तो कोई बात बने !!

न सँकू मिलता उठ ऊँचा असमानों तक !
किसी गिरते को उठाओ तो कोई बात बने !!

है चार पल की जिंदगी ना रोके बीता !
हर पल हंसके बिताओ तो कोई बात बने !!

सारी दौलत लूटा के ना मिले प्यार कहीं !
दिल ये अपना तुम लुटाओ तो कोई बात बने !!

मोहब्बत !!



मोहब्बत क्या है ये अब तक मै जान ना पाया !
कही दीवानगी कभी पागलपन है बतलाया !!

कोई कहता मोहब्बत नाम हर दम साँथ रहने का !
जो बाँटे हर खुशी मिलके हर गम साँथ सहने का !!
चले हर राह तेरे साँथ जैसे हो तेरा सायाँ !

मोहब्बत क्या लैला और मजनू की कहानी मे !
या मुमताज की यादों भरी इस निशानी मे !!
के है जो हीर और रांझे के किस्सों मे पाया !

मोहब्बत नाम अपने प्यार पर सब कुछ लुटाने का !
ना हो अफ़सोस खातिर यार के सब कुछ गवाने का !!
रहे वो दूर जितना और मन के पास ही आया !

ये वो अहसास जो रिश्तों मे बंध कर रह नही सकता !
करे महसूस ना कोई ख़ुद है क्या कह नही सकता !!
समझ आया न बिन जाने ज़माने भर ने समझाया !