Monday, May 12, 2008

मै चुप हूँ !!



हूँ चुप तो ये नही समझो , कुछ मै कह नही सकता !
तुम्हारे शब्द रूपी बाणों को , मै सह नही सकता !!
ना समझो है नही मुझको , तुम्हारे शब्दों का ज्ञान !
हूँ चुप मै इसी मे है , तुम्हारा और मेरा मान !!

सुना कर शब्द कटु कुछ , मै तुमसे जीत भी जाऊँ !
दिखा कर क्रोध अपना , तुम को मै भयभीत भी पाऊँ !!
मगर संस्कारों की सीमा है , मर्यादा का है भान !
हूँ चुप मै इसी मे है , तुम्हारा और मेरा मान !!

बहुत छोटी सी ये बात , फिर कुछ उग्र हो जाए !
अभी जो शांत है एक दूजे पे , हम रुद्र हो जाए !
खो जाएगा प्रेम , बस टकरायेंगे अभीमान !!
हूँ चुप मै इसी मे है , तुम्हारा और मेरा मान !!

रहूंगा मौन मै फिर भी , कहो कायर पराजित तुम !
न चाहू वो विजय जिसमे हो , रिश्तों की गर्मी गुम !!
झूटी जीत से प्यारा , अपने रिश्ते का सम्मान !
हूँ चुप मै इसी मे है , तुम्हारा और मेरा मान !!

1 comment:

priyanka mishra said...

rinku lagta hai jaise me aur wo samne hai me apni bat unse is kavita
ke dwara kah rahi hu.