Friday, November 7, 2008

एक तन्हा मन



एक भोला मन प्यारी आँखे जाने किसको ढूंड रही !
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!

है नादाँ सी कभी कभी , और भोली लगती हर दम है !
पर मन मे तूफान भरा है , पड़ती किसी से ना कम है !
करना है दुनिया को बस मे , सीखना है हर बात नयी !!
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!

मुस्काता सा चहरा इसका , आंखे झील समाई है !
हे मन से भी सुंदर उतनी , ये परी जमी पे आई है !
शब्द ख़तम हो पर बचजाये , इसकी खूबी कई कई !!
देखे सपने जाने किसके जाग जाग के रात कईँ !!

Monday, September 22, 2008

अब घर जाना है !!



बहुत हुआ अब घर जाना है !
खोये अपने उन सपनों को पाना है !!

छुटे हाथ झलकती आँखे, सिसकी भर भर चलती सांसे !
पोंछने फिर पलक के आंसू, अपने हाथ बड़ाना है !!

छोड़ी गलियाँ वो चौपाले, छत पे मंडली डेरा डाले !
शाम सुनहरी फिर करदे वो, महफ़िल यार सजाना है !!

प्यार से मिलते संगी साँथी, सिर्फ़ प्रेम की भाषा आती !
बोल जो मीठे भूल चुका मै, फिर होंठो पे लाना है !!

वक्त नही अपनों के खातिर, समय चाल समझा ना शातिर !
पास रहे जो बचे हुए पल, अपनों संग बीताना है !!

सब कुछ है पर मन है खाली, बेरंग होली सूनी दीवाली !
अबके दीवाली दीप जलाऊँ, होली रंग उड़ाना है !!

फ़िर अपनों के संग रहूँगा, मन का हर एक दर्द कहूँगा !
मिला नही बरसों से जो, खोया प्यार पाना है !!

मेरे संग गुनगुनाओ !!



तुम मेरे संग गुनगुनाओ तो कोई बात बने !
थोड़ा खुलकर के मुस्कुराओ तो कोई बात बने !!

रोज मिलते हो गले यारों से !
हाथ दुश्मन से मिलाओ तो कोई बात बने !!

जलते हर शाम मंदिरो मे दिये !
एक घर रौशनी लाओ तो कोई बात बने !!

तेरी बातों पे मुस्कूरादे ये जग चाहे !
किसी रोते को हंसाओ तो कोई बात बने !!

न सँकू मिलता उठ ऊँचा असमानों तक !
किसी गिरते को उठाओ तो कोई बात बने !!

है चार पल की जिंदगी ना रोके बीता !
हर पल हंसके बिताओ तो कोई बात बने !!

सारी दौलत लूटा के ना मिले प्यार कहीं !
दिल ये अपना तुम लुटाओ तो कोई बात बने !!

मोहब्बत !!



मोहब्बत क्या है ये अब तक मै जान ना पाया !
कही दीवानगी कभी पागलपन है बतलाया !!

कोई कहता मोहब्बत नाम हर दम साँथ रहने का !
जो बाँटे हर खुशी मिलके हर गम साँथ सहने का !!
चले हर राह तेरे साँथ जैसे हो तेरा सायाँ !

मोहब्बत क्या लैला और मजनू की कहानी मे !
या मुमताज की यादों भरी इस निशानी मे !!
के है जो हीर और रांझे के किस्सों मे पाया !

मोहब्बत नाम अपने प्यार पर सब कुछ लुटाने का !
ना हो अफ़सोस खातिर यार के सब कुछ गवाने का !!
रहे वो दूर जितना और मन के पास ही आया !

ये वो अहसास जो रिश्तों मे बंध कर रह नही सकता !
करे महसूस ना कोई ख़ुद है क्या कह नही सकता !!
समझ आया न बिन जाने ज़माने भर ने समझाया !

Wednesday, August 6, 2008

बदला है ये वक़्त !!



नही अपना कोई साँथ बदला है ये वक़्त !
हर तन्हा कटे रात बदला है ये वक़्त !!

हर दम संग रहे जो बिछडे ना कभी !
एक पल को नही साँथ बदला है ये वक़्त !!

जेब मे रख फुर्सत घूमते थे कभी !
आज आता नही है हाथ बदला है ये वक़्त !!

जीती बाजी भी एक पल मे हार जाता है !
आदमी की क्या औकात बदला है ये वक़्त !!

साँथ सुख मे थे वो दुःख मे नही !
सो गए उनके जस्बात बदला है ये वक़्त !!

उसको बस एक झलक देखने का अरमा था !
पर ना हो पाई मुलाकात बदला है ये वक़्त !!

आज तन्हा है जो कल सब का प्यारा था !
देदो कोई इश्क की खैरात बदला है ये वक़्त !!

लम्बी है रात फ़िर भी सहर तो आएगी !
बदलेंगे तेरे भी हालत बदला है ये वक़्त !!

कवीता !!



तुम हो मेरा प्रेम कवीता मै कवि प्रियतम तेरा !
मेरी कल्पना से तुम हो , तेरा ही ह्रदय बसेरा !!

खुश होता तो तुमको लिखता फूल क्यारी बगिया !
दुःख मे आंखे नम होती, तुम होती अश्रु नदिया !!
मन मस्ती मे हो चंचल , तुम बनती पंछी डेरा !

जब अपनों से दूर रहा तुझमे ही याद बसाई है !
चुप रहकर भी तेरे जरिये अपनी बात सुनाई है !!
तुम संग तन्हा रात लिखी , यादों से भरा सवेरा !

तुझमे बचपन की पगडन्डी , जीवन के संघर्ष लिखे !
गोद मे सर रखकर सहलाते माँ के वो स्पर्श लिखे !!
ख्वाबों मे उस परी का चलना हाथ थाम कर मेरा !

मै मर जाउँगा !!





अबके बरस भी गर ना बरसी मै मर जाउँगा !
अपने बच्चों को भूखा देख ना पाउँगा !!

हर बरस आस मे तेरी करता रहा बुआई !
तेरे बिन प्यासी फसलें आस लिए मुरझाई !!
जम के तुम एक बार तो बरसो मै तर जाऊँगा !

मन दुःख के बादल उमड़े आसमान है खाली !
आँखों से सावन बरसे बरखा ना आने वाली !!
गर तुम खेत भिगो ना पाई, मै माटी मिल जाऊंगा !!

पिछला कर्ज चुकाने मे गिरवी रखी जमीन !
आई ना इस बार फसल हो जाऊँ खेत विहीन !!
अन्न था जो घर सब बो डाला अब क्या खाऊँगा !!

भूख से बच्चे मुरझाये भागवान है चिंतित !
इश्वर को दया न आये पिघले नही है किंचित !!
लगता सब को लेकर भगवन पास तुम्हारे आऊंगा !!