Monday, September 22, 2008

मोहब्बत !!



मोहब्बत क्या है ये अब तक मै जान ना पाया !
कही दीवानगी कभी पागलपन है बतलाया !!

कोई कहता मोहब्बत नाम हर दम साँथ रहने का !
जो बाँटे हर खुशी मिलके हर गम साँथ सहने का !!
चले हर राह तेरे साँथ जैसे हो तेरा सायाँ !

मोहब्बत क्या लैला और मजनू की कहानी मे !
या मुमताज की यादों भरी इस निशानी मे !!
के है जो हीर और रांझे के किस्सों मे पाया !

मोहब्बत नाम अपने प्यार पर सब कुछ लुटाने का !
ना हो अफ़सोस खातिर यार के सब कुछ गवाने का !!
रहे वो दूर जितना और मन के पास ही आया !

ये वो अहसास जो रिश्तों मे बंध कर रह नही सकता !
करे महसूस ना कोई ख़ुद है क्या कह नही सकता !!
समझ आया न बिन जाने ज़माने भर ने समझाया !

Wednesday, August 6, 2008

बदला है ये वक़्त !!



नही अपना कोई साँथ बदला है ये वक़्त !
हर तन्हा कटे रात बदला है ये वक़्त !!

हर दम संग रहे जो बिछडे ना कभी !
एक पल को नही साँथ बदला है ये वक़्त !!

जेब मे रख फुर्सत घूमते थे कभी !
आज आता नही है हाथ बदला है ये वक़्त !!

जीती बाजी भी एक पल मे हार जाता है !
आदमी की क्या औकात बदला है ये वक़्त !!

साँथ सुख मे थे वो दुःख मे नही !
सो गए उनके जस्बात बदला है ये वक़्त !!

उसको बस एक झलक देखने का अरमा था !
पर ना हो पाई मुलाकात बदला है ये वक़्त !!

आज तन्हा है जो कल सब का प्यारा था !
देदो कोई इश्क की खैरात बदला है ये वक़्त !!

लम्बी है रात फ़िर भी सहर तो आएगी !
बदलेंगे तेरे भी हालत बदला है ये वक़्त !!

कवीता !!



तुम हो मेरा प्रेम कवीता मै कवि प्रियतम तेरा !
मेरी कल्पना से तुम हो , तेरा ही ह्रदय बसेरा !!

खुश होता तो तुमको लिखता फूल क्यारी बगिया !
दुःख मे आंखे नम होती, तुम होती अश्रु नदिया !!
मन मस्ती मे हो चंचल , तुम बनती पंछी डेरा !

जब अपनों से दूर रहा तुझमे ही याद बसाई है !
चुप रहकर भी तेरे जरिये अपनी बात सुनाई है !!
तुम संग तन्हा रात लिखी , यादों से भरा सवेरा !

तुझमे बचपन की पगडन्डी , जीवन के संघर्ष लिखे !
गोद मे सर रखकर सहलाते माँ के वो स्पर्श लिखे !!
ख्वाबों मे उस परी का चलना हाथ थाम कर मेरा !

मै मर जाउँगा !!





अबके बरस भी गर ना बरसी मै मर जाउँगा !
अपने बच्चों को भूखा देख ना पाउँगा !!

हर बरस आस मे तेरी करता रहा बुआई !
तेरे बिन प्यासी फसलें आस लिए मुरझाई !!
जम के तुम एक बार तो बरसो मै तर जाऊँगा !

मन दुःख के बादल उमड़े आसमान है खाली !
आँखों से सावन बरसे बरखा ना आने वाली !!
गर तुम खेत भिगो ना पाई, मै माटी मिल जाऊंगा !!

पिछला कर्ज चुकाने मे गिरवी रखी जमीन !
आई ना इस बार फसल हो जाऊँ खेत विहीन !!
अन्न था जो घर सब बो डाला अब क्या खाऊँगा !!

भूख से बच्चे मुरझाये भागवान है चिंतित !
इश्वर को दया न आये पिघले नही है किंचित !!
लगता सब को लेकर भगवन पास तुम्हारे आऊंगा !!

Tuesday, June 3, 2008

जोकर !!



हँसता ख़ुद और खूब हँसाता , कहते सब उसको जोकर !
कभी उचकता कभी संभलता , फिर गिरता खाकर ठोकर !!

नए नए चहरे लगा , वो नाँच दिखाता है !
पर उसका असली चहरा , कही नजर ना आता है !!
ठोकर पे सब मुसकाए , आंसू उसके पानी लगता !
मातम उसका मनोरंजन , रोने पे ये जग हँसता !!
नये नये रंग दिखलाता , अपना असली रंग खो कर !
हँसता ख़ुद और खूब हँसाता , कहते सब उसको जोकर !

डरता उसका चहरा भी , सबको हँसी दिलाता है !
झूले से बेखोफ कूदता , पर मन मे घबराता है !!
घर उसके मातम भी हो , पर वो हँसता ही दिखता !
भूखे बच्चों की खातिर , वो जोकर बन फिर बिकता !!
भूल सभी गम चल देता , जो दुनिया चाहे वो हो कर !
हँसता ख़ुद और खूब हँसाता , कहते सब उसको जोकर !

इस रंगी चहरे के पीछे , मुर्झाया एक चहरा है !
मायूसी की चादर है , आंखो मे काला घेरा है !!
गौर से देखो हंसती आँखे , उसकी हालत बताती है !
मजबूरी भी कभी कभी , जोकर बना हँसाती है !!
पर फिर भी वो खेल दिखाता , अपने आँसू मुह धोकर !
हँसता ख़ुद और खूब हँसाता , कहते सब उसको जोकर !

पंछी !!



उड़ते परिंदे पे निशाना
साधा ही था
की आवाज आयी ,

पापा हमे भी उड़ना सिखाओ .
हमे भी असमान मे जाना है
चाँद तारों को पाना है ..

सुनकर ये खयाल आया ,
की पंछी उड़ने का हौसला देता है..
हवाओं को चीर आगे बडो ,
पंख फैला कर कहता है ...

गर गिर गया आज मेरे निशाने से,
तो कौन देगा हौसला उड़ने का ..
कौन कविताओ मे बनेगा प्रतीक,
आगे बड़ने का..

फिर शायद मेरी बेटी भी ना कहे
उससे उड़्ना है ,
आगे बड़ चाँद तारे
मुट्ठी मे करना है..

इन्ही सोच मे
हाथ थम गए,
और असमान का पंछी
छितिज मे ओझल हो गया ...

Monday, June 2, 2008

बम विस्फोट हुआ !!



शाम सुनहरी हँसते चहरे , कहीँ आरती अजान दुआ !
लौट रहे थे पंछी घर को , सूरज पश्चिम ओंट हुआ !!
उभरे तब आतंकी चहरे , दन से बम विस्फोट हुआ !
बिखरी चिथडों मे लाशें , फैला रक्त रुदन धुआँ !!

कुछ पल फैला सन्नाटा , फिर दशों दीशा चीत्कार उठी !
देख नजारा दहशत का , हर नयन अश्रु बौछार उठी !!
बहा लहू पानी सा , कदम कदम पे लाश पड़ी !
खैल घिनौना खेल यहाँ , अभिमानित सी मौत खड़ी !!
कुछ वह्सी लोगों मे फिर , मानव बस एक नोट हुआ !
उभरे कुछ आतंकी चहरे , दन से बम विस्फोट हुआ !!

बचे हुए जब संभले भागे , जो घायल उन्हें बचाने को !
बीछडे भगदड़ मे परिजन , मृत या जीवीत मिलाने को !!
उड़ा कहीँ पैर किसी का , खो गयी कहीँ नयन ज्योति !
सन्नाटा कानो ने ओड़ा , दूर कही वाणी लौटी !!
घाव लिए हिचकी भर रोता , जीवन मन चोट हुआ !
उभरे कुछ आतंकी चहरे , दन से बम विस्फोट हुआ !!

ढूंड रहे खोया जो अपना , घायलों के डेरो मे !
मिला नही जब जीवीत ढूंडे , लाशों के ढेरों मे !!
कही किसी का लाल मिला , कही मिला घायल भाई !
कुछ लोगो की किस्मत ना, मृत परिजन देह आयी !!
कोई म्रत्यु वरन हुआ , कोई जीवन ओंट हुआ !
उभरे कुछ आतंकी चहरे , दन से बम विस्फोट हुआ !!

फिर भोर भई अगली , जो बचे वापस काम चले !
दो मिनट हुआ मोन , कुछ जगह शोक फूल डले !!
फिर चला घोशना दौर , यहाँ स्मारक बनवायेंगे !
हर घायल को दुर्घटना की, छतिपुर्ती दिलवाएंगे !!
कुछ नेता मृत घर पहुचे, जीवित परिजन एक वोट हुआ !
हर बार यही होता है , जब जब बम विस्फोट हुआ !!

समटी लाशों के टुकडों मे , किसका मजहब कौन कहे !
पटा पड़ा फर्शो पे लहू , क्या उसमे कोई धर्म बहे !!
गहरे जख्मो ने कभी क्या , अपनी जात बताई है !
निर्दोशो की बलि चडै , कैसी जेहाद बनाईं है !!
क्या किलकारी मे राम राम, या अल्लाह अल्लाह बोध हुआ !
तो फिर क्यों मजहब के नाम , एक और विस्फोट हुआ !!