
राह तकी सूरज सर तक , हर आहट आंगन दौड़ गयी !
आस लगी आओगे पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !!
रोली हल्दी थाल सजायी , घीसा चंदन बाती बनाईं !
आओ द्वार आरती उतारू , भर घी दीपक जोत जलाई !!
माथे तिलक लगाती पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !
लीपा आंगन ओटली धोली , दरवाजे मांडी रंगोली !
थके तेरे पैरो पे लगाने , थोडी सी महंदी भी घोली !!
अपने हाथ लगाती पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !
तेरी पसंद की साग बनाईं , जूने चावल खीर पकाई !
आते गरम पूरी तल देती , जला के चूल्हा रखी कडा़ई !!
अपने हाथ खिलाती पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !
पीपल नीचे खाट लगाई , ढीली निमार कल कसवाई !
थक कर लेटोगे कुछ पल , हाथ बुनी दरी बिछाई !!
आंचल हवा झिलाती पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !
हर दिन यूं ही राह तकी , बरस गए पर आस बची !
अंत साँस तक इन्तजार मे , पीपल नीचे खाट रखी !!
आज हुई दरवाजे दस्तक , तुम आए पर मै सोई !
आस लगी आओगे पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !!
आस लगी आओगे पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !!
रोली हल्दी थाल सजायी , घीसा चंदन बाती बनाईं !
आओ द्वार आरती उतारू , भर घी दीपक जोत जलाई !!
माथे तिलक लगाती पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !
लीपा आंगन ओटली धोली , दरवाजे मांडी रंगोली !
थके तेरे पैरो पे लगाने , थोडी सी महंदी भी घोली !!
अपने हाथ लगाती पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !
तेरी पसंद की साग बनाईं , जूने चावल खीर पकाई !
आते गरम पूरी तल देती , जला के चूल्हा रखी कडा़ई !!
अपने हाथ खिलाती पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !
पीपल नीचे खाट लगाई , ढीली निमार कल कसवाई !
थक कर लेटोगे कुछ पल , हाथ बुनी दरी बिछाई !!
आंचल हवा झिलाती पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !
हर दिन यूं ही राह तकी , बरस गए पर आस बची !
अंत साँस तक इन्तजार मे , पीपल नीचे खाट रखी !!
आज हुई दरवाजे दस्तक , तुम आए पर मै सोई !
आस लगी आओगे पर , ना तुम आए ना ख़त कोई !!





